24 अप्रैल से 7 मई तक वैशाख शुक्ल पक्ष अत्यन्त पुण्यफलदायक
आचार्य राधाकान्त शास्त्री जी के अनुसार 24 अप्रैल से 7 मई तक वैशाख शुक्ल पक्ष अत्यन्त पुण्यफलदायक है।
इस समय विश्व पर आए संकट से अपने परिवार एवं सम्पूर्ण राष्ट्र को बचाने व सबकी सुरक्षा में *काल चक्र दशा से विश्व व्याप्त महामारी संकट के 8 फरवरी 2020 से 16 जुलाई 2020 तक के दुष्प्रभाव से अपने परिवार एवं राष्ट्र को बचने के लिए संयमिय रहें, सुरक्षित रहें,*
*इसमें वही सुरक्षित रहेगा जो भगवान के सहारे सिर्फ घर पर ही रहेगा।*
अन्यथा सब कुछ खत्म हो सकता है।
*संका :-*
चलती चाकी देखकर , दिया कबीरा रोय ।
दुइ पाटन के बीच में , साबुत बचा ना कोय ।।
*समाधान*
कील ( ईश्वर) सहारे जो रहे वो साबूत बच जाय ।।
*आपके जीवन चक्र की कील प्रभु में विश्वास श्रद्धा, समर्पण ही सबके जीवन का सहारा है, सांसे हैं!*
*अतः सभी संतों, सामाजिक लोगों, सज्जनों एवं आचार्यों से हमारी कर बद्ध प्रार्थना है कि इस विश्व संकट से अपने बंधु बांधव सहित राष्ट्र को बचाने के लिए अपने घरों में शनि राहु केतु व महामृत्युंजय का पाठ मंत्र जप का अनुष्ठान आरम्भ करें एवं करावें। कृपया सभी ब्राह्मण अपने सभी यजमानों की सुरक्षा के साथ राष्ट्र के सुरक्षा के लिए अपने अपने घरों में अपना अधिकतम समय भगवान के आराधना में अर्पित करें, प्रभु सबका निश्चय ही सुनेंगे और सबके जीवन जीविका की रक्षा करेंगे
24 अप्रैल शुक्रवार से वैशाख माह का शुक्लपक्ष शुरु हो गया है। इस पक्ष मे महत्वपूर्ण पर्व त्योहार आते है जिसमें विशेष पूजा करने का विधान है। इन महत्वपूर्ण तिथियों पर भगवान विष्णु, बुद्ध, देवी दुर्गा और गंगा की पूजा के साथ साथ दान देने का भी बहुत महत्व है। वैसे तो पूरे वैशाख माह में ही दान दिया जाता है, लेकिन इन महत्वपूर्ण दिनों में दान देने से उसका फल और बढ़ जाता है। इन महत्वपूर्ण पर्व और तीज-त्योहारों की शुरुआत 25 अप्रैल शनिवार से होगा। फिर 26 अप्रैल रविवार को अक्षय तृतीया है, और इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाया जाएगा ।
इस दिन का किया गया पुण्य और दिया गया दान अक्षय फल देता है। वहीं सूर्य और चंद्रमा उच्च राशि में होने से समस्त शुभ कार्यो में सहायक होंगे,
28 अप्रैल वैशाख शुक्लपक्ष की पंचमी रोज मंगलवार को आद्य गुरु शंकाराचार्य जी का जन्म हुआ था। इसी दिन श्रीकृष्णभक्त संत सूरदास जी का भी जन्म हुआ था। 30 अप्रैल सप्तमी रोज गुरुवार को गंगाजी की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इसी तिथि को महर्षि जह्नु ने अपने दक्षिण कर्ण से गंगा जी को बाहर निकाला था। इस दिन भगवान चित्रगुप्त का प्राकट्योत्सव भी मनाया जाता है। तथा इसी तिथि पर भगवान बुद्ध का भी जन्म हुआ था।
1 मई वैशाख शुक्ल अष्टमी शुक्रवार को अपराजिता पूजा की जाती है। इस दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा को कपूर और जटामासी युक्त जल से स्नान कराना चाहिए। दिनभर व्रत भी करना चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले को भी पानी में थोड़ा सा आम का रस डालकर नहाना चाहिए। इस तरह व्रत और पूजा करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है।
1 मई, को ही वैशाख शुक्लपक्ष की नवमी तिथि मनाया जाएगा।इसी दिन सीता नवमी है। इस दिन को जानकी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इसी तिथि पर राजा जनक के हल चलाते समय पृथ्वी माता से देवी सीता प्राप्त हुई थी।
3 मई,वैशाख शुक्ल पक्ष एकादशी रोज रविवार को मोहिनी एकादशी है। इस व्रत के प्रभाव से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं और व्रत करने वाले पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। तथा पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है।
5 मई,वैशाख शुक्लपक्ष के प्रदोष व्रत हर तरह के संकट दूर करने वाला होता है। इस बार ये व्रत मंगलवार को होने से भौम प्रदोष का संयोग बन रहा है। इस व्रत को करने से कर्जा और बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
6 मई,वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि रोज बुधवार को भगवान नृसिंह रूप लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया और उसे मोक्ष प्रदान किया था।
7 मई,वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को ब्रह्मा जी ने श्वेत तथा कृष्ण तिलों का निर्माण किया था। इसलिए इस दिन सफेद और काले तिलों को पानी में डालकर स्नान करना चाहिए, अग्नि में तिलों की आहुति देकर शहद और तिलों से भरा हुआ मिट्टी का बर्तन दान देना चाहिए। जय श्री कृष्ण। आचार्य राधाकान्त शास्त्री। 9934428775,
बेतिया, के अनुसार 24 अप्रैल से 7 मई तक वैशाख शुक्ल पक्ष का समस्त शुभ पुण्य कारक व्रत प्रभाव से राष्ट्र सहित सम्पूर्ण देश वासियों का सभी रोग शोक संकट समाप्त हो और वैशाख मास का सम्पूर्ण व्रत पर्व सबके लिए अत्यन्त पुण्य फल दायक हो। आचार्य राधाकान्त शास्त्री, 9934428775,

